कभी न थकने वाले मेरे पापा ..
जब आज थक कर बैठ जाते हैं
फिर भी “मैं ठीक हूं” कहकर हमें बहलाते हैं
हमारी हर जरूरत को बिन कहे समझ जाते हैं
और अपनी जरूरत को… “जरूरत नहीं” बतलाते हैं।
मानो कल की ही बात हो….
अपनी छोटी सी मुट्ठी में उनकी उंगली जकड़ लेती थी,
काजू, किशमिश, गुड़िया, खिलौने दिलाने की जिद पकड़ लेती थी…
पापा का बस इतना कहना…” जो पसंद है वो ले ले”
ये सुन कर मैं फूली नहीं समाती थी
मैं भी बिगड़ी शहजादी जैसे खूब इतराती थी।
आज भी मेरी एक जिद्द है …
जिसे आपको ही है पूरा करना
ईश्वर ने जो ली है परीक्षा …
उसमें आपको है खरा उतरना।
कुछ कड़वे दिन हैं ये
बस आप हिम्मत रखना
हम जीत कर दिखाएंगे।
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