• Kalamkaar

    एक नारी सब पर भारी

    मैं एक नारी हूं आप सभी लोग यह सोच रहे होंगे कि मैंने अपना नाम क्यों नहीं बताया क्योंकि आज भी लोग नारी को सिर्फ नारी की नजर से देखते हैं किसी नाम की नजर से नहीं इसी संदर्भ में कुछ पंक्तियां आपसे साझा करना चाहती हूं बचपन से मुझे…

  • Kalamkaar

    थक गई हूँ …. पर हारी नहीं हूँ मैं….

    जमानें के तानों से..बेबुनियाद इल्ज़ामों से..बीते हुए अफ़सानो से..थक गई हूँ ….पर हारी नहीं हूँ मैं.. बेवज़ह नफ़रतों से …मतलबी जरूरतों से..एक तरफ़ा समझोतों से…थक गई हूँ ….पर हारी नहीं हूँ मैं…. अब अपने आँसू खुद ही पोंछ लेती हूँ..होठों पर लफ्ज़ आने से पहले ही रोक लेती हूँ..अपने लिए…