मैं एक नारी हूं आप सभी लोग यह सोच रहे होंगे कि मैंने अपना नाम क्यों नहीं बताया क्योंकि आज भी लोग नारी को सिर्फ नारी की नजर से देखते हैं किसी नाम की नजर से नहीं इसी संदर्भ में कुछ पंक्तियां आपसे साझा करना चाहती हूं बचपन से मुझे…
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थक गई हूँ …. पर हारी नहीं हूँ मैं….
जमानें के तानों से..बेबुनियाद इल्ज़ामों से..बीते हुए अफ़सानो से..थक गई हूँ ….पर हारी नहीं हूँ मैं.. बेवज़ह नफ़रतों से …मतलबी जरूरतों से..एक तरफ़ा समझोतों से…थक गई हूँ ….पर हारी नहीं हूँ मैं…. अब अपने आँसू खुद ही पोंछ लेती हूँ..होठों पर लफ्ज़ आने से पहले ही रोक लेती हूँ..अपने लिए…