• Kalamkaar

    कन्यादान

    वंदना के पापा इधर से उधर कभी किसी को डांटते हुए तो कभी फूलों की लड़ियों को ठीक करते हुए घूम रहे थे ….अजीब से भाव थे उनके चेहरे पे आज …क्यों न हो आज उनकी इकलौती बेटी की शादी जो थी …कभी हलवाई को समझाते हुए की खाना तो…