श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है रक्षाबंधन का त्यौहार……यह त्यौहार प्रतीक है भावनाओं का और दर्शाता है भाई बहन का प्यार…… एक पौराणिक कथा का करते हैं व्याख्यान…..जिसमें द्रौपदी को श्री कृष्ण ने दिया था रक्षा का वरदान….. बात महाभारत के समय की है जब शिशुपाल का वध…
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वो आखरी मुलाकात…….
वो बुधवार का दिन था और दिसंबर की रात थी…ना पापा जानते थे ना मैं वो हमारी आखरी मुलाक़ात थी….पापा ने सर पर हाथ फेरा और बिठाया अपने पास…नज़रें बता रही थी उन्हें मुझसे मिलने की थी आस… .आंखों में समंदर सा गहरा पानी…. मुस्कान से छुपा ली उन्होंने अपनी…
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तेज रफ़्तार
तेज रफ़्तार जब करे जिंदगी पर वार…जिंदगी नहीं देती मौका बार बार….. ना मिलती फिर जिंदगी उधार…. तेज रफ़्तार जब करे जिंदगी पर वार….. Cool blue जैकेट और rugged जीन्स पहनकर जब वो निकलता था…अपने से दोगुनी वजन वाली बाइक पर चढ़ता था… मां बेचैन निगाहों से जब तक ओझल…
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अल्फ़ाज़ संग गीत
बात उस समय की है जब मेरी नन्ही परी रागिनी का पहला दिन था विद्यालय में |मन में नई उमंगे लिए बिना अलार्म के ही 5:30 बजे उठ गई,इस्त्री किए गए कपड़े दोबारा इस्त्री किए, बस कोई कमी ना रह जाए |6:30 बजे रागिनी को उठाया तो दिल ने यह…
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40 के पार का Valentine Day 🌹
वैलेंटाइन डे से हमें क्या लेना देना, ऐसा है दिमाग का कहना जी, परंतु जो छोटा सा दिल है वह तो अभी बच्चा है जी… मिल जाते गुलाब और अनेक उपहार, बन जाते हम भी 1 दिन के सुपरस्टार… यही सोचते-सोचते हमने भी इस बार ठान ली, वैलेंटाइन डे होगा…
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मैं और मेरा दोस्त
चाय का प्याली से,फूलों का डाली से कुछ ऐसा रिश्ता है मेरा और मेरे दोस्त का जो कभी था अनजान ,आज मेरा दोस्त कहलाता है ना जाने इतना अटूट रिश्ता कैसे बन जाता है हर सुख दुख में मेरा साथी है हां वो मेरा हमराही मेरा दोस्त मेरा जीवन साथी…
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होली # “हो” “ली”
होली का त्यौहार है आया रंग बिरंगी खुशियां लाया ठहरों ठहरों रुको रुको कहाँ है ये खुशियां ज़रा ये तो बताओ , जो लोग बाँटते है खुशियां ज़रा उन से तो मिलवाओ | इस जहां में जहाँ हर एक इंसान एक दूसरे से जलता है , फिर होलिका दहन करने…
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शादी की दावत (थोड़ा व्यंग ,थोड़ी सीख )
बिट्टू जी की शादी में पकवान बने मजेदारक्या खाएं क्या ना खाएं सोच में पड़ गए यार हमने कभी किसी को ना कहना ना सीखा थाइसलिए सब कुछ प्लेट में थोड़ा-थोड़ा परोसा था सब कुछ प्लेट में परोस कर नए पकवानों का किया अविष्कार कढ़ाई पकोड़ा, कोफ्ता मखनी, दाल कढ़ी…
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मिट्टी के दिये
दोस्तों कैसी रही आप सबकी दिवाली ..उम्मीद है बढ़िया ही रही होगी ..आप सोच रहे होंगे दिवाली तो अब अगले साल आएगी तो आज ये “मिट्टी के दिये” कविता क्यों ….मन में कुछ विचार आया तो सोचा क्यों ना आप सब के साथ कुछ पंक्तियों के माध्यम से साझा करूं..…
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कहां खो गई मेरी वाली दिवाली
ना जाने कहां खो गई है वह दिवाली, जिसकी करते थे एक महीने पहले से तैयारी घर घर बनते थे नए नए पकवान, क्योंकि आते थे त्यौहार पर ढेरों मेहमान एक दूसरे के घर खील ,बताशे और मिठाई प्लेट में सजाकर ले जाते थे ,नए नए कपड़े पहन कर खूब…