• Kalamkaar

    बूढ़ा….. बचपन

    क्या कहता है बूढ़ा मन..जैसे लौट रहा बचपन। पास उनके जाओ,बैठो दो पल ।तुम अपना आज सुनाओ,वो सुनाए बीता कल।। माना धुंधली हो गई है नज़र,पर फिर भी चेहरा लेते पढ़।कब खुश हो तुम, कब परेशान,आसानी से लेते पहचान ।। बच्चों से महके आँगन,और बड़ों से बनते हैं घर ।बच्चों…

  • Kalamkaar

    चाय बना दो से चाय बना दूं का सफर

    शादी के अगले दिन जब राधिका उठी तो वो एक नए परिवार में थी …यहाँ प्यार तो था पर माँ जैसा नहीं …यहाँ सब अपने थे पर अपनापन नहीं …यहाँ आशीर्वाद तो था पर पापा के हाथ का स्पर्श नहीं… यहाँ “मम्मी चाय बना दो”,” मम्मी जी चाय बना दू”…