• Kalamkaar

    थक गई हूँ …. पर हारी नहीं हूँ मैं….

    जमानें के तानों से..बेबुनियाद इल्ज़ामों से..बीते हुए अफ़सानो से..थक गई हूँ ….पर हारी नहीं हूँ मैं.. बेवज़ह नफ़रतों से …मतलबी जरूरतों से..एक तरफ़ा समझोतों से…थक गई हूँ ….पर हारी नहीं हूँ मैं…. अब अपने आँसू खुद ही पोंछ लेती हूँ..होठों पर लफ्ज़ आने से पहले ही रोक लेती हूँ..अपने लिए…

  • Kalamkaar

    एक मैं और एक तुम……

    एहसासों की डोर से बंधे हैं दोनों।इनसे जुदा तू भी नहीं, जुदा मैं भी नहीं।। महफिलों में मिलते हैं सबसे मुस्कुराकर।सबको पता हैं खुश तू भी नहीं , खुश मैं भी नहीं।। बाँध रखा है दोनों को, अहम की जंजीरों ने।वरना खफ़ा तू भी नहीं , खफ़ा मैं भी नहीं।।…