Kalamkaar

एक मैं और एक तुम……

एहसासों की डोर से बंधे हैं दोनों।
इनसे जुदा तू भी नहीं, जुदा मैं भी नहीं।।

महफिलों में मिलते हैं सबसे मुस्कुराकर।
सबको पता हैं खुश तू भी नहीं , खुश मैं भी नहीं।।

बाँध रखा है दोनों को, अहम की जंजीरों ने।
वरना खफ़ा तू भी नहीं , खफ़ा मैं भी नहीं।।

भूल हो जाती है इंसानो से।
खुदा तू भी नहीं, खुदा मैं भी नहीं।।

चल फिर एक नई शुरआत करें।
इस खेल में हारा तू भी नहीं, जीती मैं भी नहीं।।

Monica's avatar

An ambitious soul who loves to find a quiet place and use a humble pen to give thoughts a valuable meaning.

One comment on “एक मैं और एक तुम……

  1. Wah

Leave a Reply