।। मौनं शून्यं नास्ति उत्तरै: परिपूर्णम् अस्ति।। एक बड़ा ब्राह्मण विद्वान्; पाँच सौ शिष्यों के साथ महात्मा बुद्ध के पास…
चाय का प्याली से,फूलों का डाली से कुछ ऐसा रिश्ता है मेरा और मेरे दोस्त का जो कभी था अनजान…
ऐ इंसान.....! माना सच के लिए न लड़ना तेरी आदत है...पर झूठ का साथ देना तेरी फ़ितरत तो नहीं ?…
शनिवार शाम से ही सुहानी अपना काम जल्दी जल्दी ख़तम कर रही थी, बहुत दिनों बाद उसने अपने लिए वक़्त…
मेरा एक सपना है.... मैं अपने पापा जैसी बन जाऊँ जैसे वो सबकी पसंद-नापसंद का..ध्यान रख लेते हैं |वैसे ही…
एक दिन कड़ाके की ठंड पड़ रही थी | ठंड से काँपते हुए कुछ बन्दर एक पेड़ के नीचे बैठ…
मैं हूं एक और किरदार अनेक निभाती हूं टूटे हुए फेवरेट खिलौनों को जोड़कर बिना डिग्री की इंजीनियर बन जाती…
एहसासों की डोर से बंधे हैं दोनों।इनसे जुदा तू भी नहीं, जुदा मैं भी नहीं।। महफिलों में मिलते हैं सबसे…