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मूर्ख को सीख

एक दिन कड़ाके की ठंड पड़ रही थी | ठंड से काँपते हुए कुछ बन्दर एक पेड़ के नीचे बैठ गए | उस पेड़ पर एक चिड़िया का घोंसला था | उनमें से एक बन्दर बोला अगर कहीं से आग तापने को मिल जाए तो ठण्ड दूर हो जाए | दुसरे बन्दर ने सुझाव दिया वहाँ कितनी सूखी पत्तियां पड़ी है उन्हें इकठ्ठा करके हम आग जला लेते हैं | बंदरों ने सूखी पत्तियों का ढेर लगाया फिर उन्हें सुलगाने का उपाय सोचने लगे | तभी एक बन्दर की नज़र हवा में उड़ते हुए एक जुगनू पर पड़ी और वह उत्साहित होकर चिल्लाने लगा देखों हवा मैं चिंगारी उड़ रही है, इसे पकड़कर ढेर के नीचे रखकर फूंक मारने से आग सुलग जाएगी |हाँ हाँ कहकर सभी बन्दर उछलने लगे | अपने घोसलें में बैठी चिड़िया यह सब देख रही थी उसने कहा बन्दर भाइयों यह चिंगारी नहीं है यह तो जुगनू है |

उसकी बात सुनकर एक बन्दर उसकी तरफ देखकर जोर से गुर्राया ” चुपचाप अपने घोसलें में दुबकी रह हमें सिखाने चली है “| इसी बीच एक बन्दर ने उछलकर जुगनू को अपनी हथेलियों में कैद कर लिया और ढेर के नीचे रख दिया और सारे बन्दर चारों ओर से ढेर को फूंक मारने लगे |
यह सब देखकर चिड़ियां फिर बोली “भाइयों आप लोग गलती कर रहे हो दो पत्थरों को रगड़कर चिंगारी पैदा करके आग सुलगाइए”| सारे बन्दर आग न सुलगने के कारण पहले ही खीजे हुए थे | एक बन्दर ने क्रोध में चिड़िया को पकड़ा ओर उसे जोर से पेड़ के तने पर दे मारा | चिड़िया फड़फड़ाती हुई नीचे गिर गयी ओर मर गयी |

कहानी से शिक्षा
– बिना मांगे किसी को भी सीख न दे
– मूर्ख को सलाह देने का कोई लाभ नहीं होता उल्टा सीख देने वाले को ही पछताना पड़ता है जैसे उपरोक्त कहानी में चिड़िया को अपनी जान से हाथ गवाना पड़ा |

source: panchatantra

Monica

An ambitious soul who loves to find a quiet place and use a humble pen to give thoughts a valuable meaning.

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Monica
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