गुड्डो! ओ गुड्डो! जल्दी से चाय बना, देख तेरी पसंद की जलेबी और कचौरी लाया हूँ, शेखर जी दरवाज़े पर दोनों हाथों में सामान लिए खड़े थे| तभी अंदर से अम्मा की आवाज़ आई, अरे! भावरा हो गया है क्या?…. गुड्डो तो कब की परायी हो गयी … तूने ही…
गुड्डो! ओ गुड्डो! जल्दी से चाय बना, देख तेरी पसंद की जलेबी और कचौरी लाया हूँ, शेखर जी दरवाज़े पर दोनों हाथों में सामान लिए खड़े थे| तभी अंदर से अम्मा की आवाज़ आई, अरे! भावरा हो गया है क्या?…. गुड्डो तो कब की परायी हो गयी … तूने ही…