है ना यह दुनिया कितनी अजीब, सोशल मीडिया पर 400 दोस्त हैं पर कोई नहीं है करीब अगर हम पोस्ट करते हैं अपनी तस्वीर कोई ‘beautiful’,’so cool’ जैसी टिपण्णी से टिपण्णी बॉक्स को सुशोभित करता हर कोई यह सब सोशल मीडिया तक ही है सीमित ऐसा लगता है फेस टू…
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नारी
हां मैं हूं एक नारी ईश्वर ने दी है मुझे बहुत बड़ी जिम्मेदारी वह बोले सिर्फ तुम्हें है अधिकार, तुम ही हो एक नया जीव इस दुनिया में लाने के हकदार कभी सोचा है ईश्वर ने सिर्फ मुझे ही क्यों चुना, क्योंकि उसने ही मुझ में समर्पण भाव है बुना…
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ऐ इंसान….. खुद को पहचान
ऐ इंसान…..! माना सच के लिए न लड़ना तेरी आदत है…पर झूठ का साथ देना तेरी फ़ितरत तो नहीं ? माना कोशिशों से घबराना तेरी आदत है …पर दूसरों को सफल देख जलना तेरी फ़ितरत तो नहीं ? माना किसी में अच्छाइयाँ न ढूँढना तेरी आदत है…पर बुराइयों के पुल…
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एक नारी सब पर भारी
मैं एक नारी हूं आप सभी लोग यह सोच रहे होंगे कि मैंने अपना नाम क्यों नहीं बताया क्योंकि आज भी लोग नारी को सिर्फ नारी की नजर से देखते हैं किसी नाम की नजर से नहीं इसी संदर्भ में कुछ पंक्तियां आपसे साझा करना चाहती हूं बचपन से मुझे…
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पैसा 💸💰…
- a good servant but a bad master
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क्या आप लोग खुश हैं वर्क फ्रॉम होम से
हां मैं भी घर से काम कर रहा हूं हां मैं अब टाइम पर नहीं उठता आलसी हो गया हूंहां अब ब्रेकफास्ट के लिए मां जल्दी-जल्दी नहीं करतीहां मैं भी घर से काम कर रहा हूं… हां वाइफ से सुबह वॉलेट और रुमाल नहीं मांगता हूंहां मैं भी घर से…
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बचपन
खेलकूद में बीता बचपन ,ना थी मन में कोई उलझन एक रुपए में आती थी टॉफी चार , खरीदते थे बाजार जा कर बार-बार स्टील के टिफिन में आलू और आम का अचार, recess में मिलकर खाते थे सब यार जब कभी मम्मी को होता था बुखार और लंच नहीं…
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कुछ पल अपने लिए
शनिवार शाम से ही सुहानी अपना काम जल्दी जल्दी ख़तम कर रही थी, बहुत दिनों बाद उसने अपने लिए वक़्त निकालने की सोची थी ….वो मन ही मन में खुश हो रही थी की कल तो वो पुरानी साड़ी से बैग बनाएगी …उसे सिलाई कढ़ाई का बहुत शोक था परन्तु…
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कोरोना काल
सब कुछ बदल गया इस corona काल मेंहम भी तुम भी सब फस गए इसके जाल में सच में कैसा वक्त आया हैसेहत ही सब कुछ है इसने हमें सिखाया है बच्चों की होती है क्लास अब भी, पर नहीं है classroomअब एक laptop है, और screen of zoom सब…
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मेरा एक सपना है….
मेरा एक सपना है…. मैं अपने पापा जैसी बन जाऊँ जैसे वो सबकी पसंद-नापसंद का..ध्यान रख लेते हैं |वैसे ही मैं अपनी इच्छा दबाकर…सबका मन पढ़ पाऊँ ||मेरा एक सपना है…. मैं अपने पापा जैसी बन जाऊँ जैसे उनकी प्यार भरी थपकी से…मैं बचपन में सो जाती थी |उसी थपकी…