फिर घमंड कैसाघी का एक लोटा,लकड़ियों का ढेर,कुछ मिनटों में राख…..बस इतनी-सी हैआदमी की औकात !!!! एक बूढ़ा बाप शाम को मर गया,अपनी सारी ज़िन्दगी,परिवार के नाम कर गया,कहीं रोने की सुगबुगाहट,तो कहीं ये फुसफुसाहट….अरे जल्दी ले चलोकौन रखेगा सारी रात…..बस इतनी-सी हैआदमी की औकात!!!! मरने के बाद नीचे देखा…