ना जाने कहां खो गई है वह दिवाली, जिसकी करते थे एक महीने पहले से तैयारी घर घर बनते थे नए नए पकवान, क्योंकि आते थे त्यौहार पर ढेरों मेहमान एक दूसरे के घर खील ,बताशे और मिठाई प्लेट में सजाकर ले जाते थे ,नए नए कपड़े पहन कर खूब…
ना जाने कहां खो गई है वह दिवाली, जिसकी करते थे एक महीने पहले से तैयारी घर घर बनते थे नए नए पकवान, क्योंकि आते थे त्यौहार पर ढेरों मेहमान एक दूसरे के घर खील ,बताशे और मिठाई प्लेट में सजाकर ले जाते थे ,नए नए कपड़े पहन कर खूब…