शादी के अगले दिन जब राधिका उठी तो वो एक नए परिवार में थी …यहाँ प्यार तो था पर माँ जैसा नहीं …यहाँ सब अपने थे पर अपनापन नहीं …यहाँ आशीर्वाद तो था पर पापा के हाथ का स्पर्श नहीं… यहाँ “मम्मी चाय बना दो”,” मम्मी जी चाय बना दू”…
शादी के अगले दिन जब राधिका उठी तो वो एक नए परिवार में थी …यहाँ प्यार तो था पर माँ जैसा नहीं …यहाँ सब अपने थे पर अपनापन नहीं …यहाँ आशीर्वाद तो था पर पापा के हाथ का स्पर्श नहीं… यहाँ “मम्मी चाय बना दो”,” मम्मी जी चाय बना दू”…