Kalamkaar

थक गयी अब …मैं जीना चाहती हूँ…

two yellow flowers surrounded by rocks

यादों से बस कुछ सुनहरे पल संझोना चाहती हूँ।
थक गयी अब …मैं जीना चाहती हूँ।।

नोक झोंक आपसी तकरार में बस
अब चुप रहना चाहती हूँ।
थक गयी अब … मैं जीना चाहती हूँ।।

हर किसी की गलती की वजह हूँ मैं
अब दलिलों में गुनेहगार ही रहना चाहती हूँ।

थक गयी अब.. मैं जीना चाहती हूँ।।

कभी शिकवा नहीं किया ईश्वर से
पर अब ‘बस और नहीं’ कहना चाहती हूँ।

थक गयी अब…मैं जीना चाहती हूँ।।

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An ambitious soul who loves to find a quiet place and use a humble pen to give thoughts a valuable meaning.

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