एक दिन नारद जी विष्णु भगवान से मिलने गए। विष्णु जी ने उनका बहुत आदर सत्कार किया। नारद जी के जाने पर विष्णु जी ने लक्ष्मी जी से कहा -” हे ! लक्ष्मी जहाँ नारद जी बैठें थे उस स्थान को गाय के गोबर से लीप दो। नारद जी अभी…
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एक मैं और एक तुम……
एहसासों की डोर से बंधे हैं दोनों।इनसे जुदा तू भी नहीं, जुदा मैं भी नहीं।। महफिलों में मिलते हैं सबसे मुस्कुराकर।सबको पता हैं खुश तू भी नहीं , खुश मैं भी नहीं।। बाँध रखा है दोनों को, अहम की जंजीरों ने।वरना खफ़ा तू भी नहीं , खफ़ा मैं भी नहीं।।…