शनिवार शाम से ही सुहानी अपना काम जल्दी जल्दी ख़तम कर रही थी, बहुत दिनों बाद उसने अपने लिए वक़्त निकालने की सोची थी ….वो मन ही मन में खुश हो रही थी की कल तो वो पुरानी साड़ी से बैग बनाएगी …उसे सिलाई कढ़ाई का बहुत शोक था परन्तु…
शनिवार शाम से ही सुहानी अपना काम जल्दी जल्दी ख़तम कर रही थी, बहुत दिनों बाद उसने अपने लिए वक़्त निकालने की सोची थी ….वो मन ही मन में खुश हो रही थी की कल तो वो पुरानी साड़ी से बैग बनाएगी …उसे सिलाई कढ़ाई का बहुत शोक था परन्तु…